बिहार मुफ्त बिजली योजना: बिहार की राजनीति में एक बार फिर से सामाजिक कल्याण और जनसरोकारों को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बड़ी घोषणा की है। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राज्य सरकार ने हर घर को 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने की योजना का ऐलान किया है। इस योजना के तहत 1 अगस्त 2025 से राज्य के लगभग 1.67 करोड़ उपभोक्ताओं को हर महीने एक तय सीमा तक मुफ्त बिजली मिलेगी।यह योजना बिहार जैसे राज्य के लिए कई मायनों में अहम है, जहां अब भी बड़ी आबादी बिजली की निर्भरता के मामले में अस्थिर है और आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को हर महीने बिजली बिल देना एक चुनौती होती है।
125 यूनिट मुफ्त बिजली: किसे होगा लाभ?
bihar सरकार के अनुसार, जिन घरेलू उपभोक्ताओं की मासिक खपत 125 यूनिट या उससे कम है, उन्हें अब बिजली बिल नहीं देना होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे राज्य के 91% परिवार लाभान्वित होंगे। यह आंकड़ा अपने आप में दर्शाता है कि योजना आम आदमी, विशेषकर निम्न मध्यम वर्ग और गरीब तबके को ध्यान में रखकर बनाई गई है।इसका मतलब यह भी है कि राज्य में बड़ी संख्या में लोग अब जीरो बिजली बिल अनुभव करेंगे, जो एक सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करेगा।
सोलर ऊर्जा को बढ़ावा: कुटीर ज्योति योजना
सरकार ने इस योजना को सिर्फ मुफ्त बिजली तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे हर घर में स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बढ़ाया है। ‘कुटीर ज्योति योजना’ के तहत: गरीब परिवारों को सरकारी खर्च पर सोलर पैनल उपलब्ध कराए जाएंगे। मध्यम वर्गीय घरों को भी रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य अगले 3 सालों में 10,000 मेगावॉट सोलर उत्पादन का है।इससे राज्य की ऊर्जा आत्मनिर्भरता तो बढ़ेगी ही, साथ ही पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
राजकोषीय भार और आर्थिक रणनीति
इस योजना पर सरकार को सालाना ₹19,000 करोड़ से अधिक का खर्च आएगा। इसमें से ₹3,375 करोड़ केवल नई सब्सिडी मद में जोड़े गए हैं। यह वित्तीय बोझ सरकार के लिए एक चुनौती जरूर है, लेकिन इसे जनकल्याण के तहत एक ‘पॉलिटिकल इनवेस्टमेंट’ के रूप में देखा जा रहा है।राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि सरकार ने इसके लिए बजटीय व्यवस्था पहले से ही तय कर ली है और इसका दीर्घकालिक लाभ आर्थिक गतिविधियों को भी प्रभावित करेगा।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और विपक्ष की प्रतिक्रिया
यह योजना ऐसे समय में घोषित हुई है जब कुछ ही महीनों में राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। विपक्ष ने इस घोषणा को एक “चुनावी जुमला” करार देते हुए कहा कि यह तेजस्वी यादव की 200 यूनिट मुफ्त बिजली वादे की नकल है। हालांकि, नीतीश सरकार का दावा है कि यह योजना पिछले दो साल से तैयार की जा रही थी और इसे चुनावों से जोड़ना गलत है। सरकार का कहना है कि यह एक दीर्घकालिक योजना है जो गरीबों को राहत देने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा को भी बढ़ावा देगी।
आम जनता की प्रतिक्रिया
राज्य के विभिन्न हिस्सों से आ रही प्रतिक्रियाओं में योजना को लेकर सकारात्मक उत्साह दिख रहा है। कई लोगों ने कहा कि यह निर्णय उनके घरेलू बजट पर प्रभाव को कम करेगा और बिजली का उपयोग करने में मनोवैज्ञानिक राहत देगा। पटना के निवासी शैलेश कुमार का कहना है, “अब हम बिना डर के पंखा और टीवी चला सकेंगे, हर महीने के बिजली बिल का टेंशन खत्म हो गया है।”
चुनावी जुमला या आम जनता का लाभ
नीतीश सरकार की मुफ्त बिजली योजना एक तरफ जहां चुनावी रणनीति हो सकती है, वहीं दूसरी ओर यह बिहार के ऊर्जा क्षेत्र और सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम भी है। यदि यह योजना पारदर्शिता और प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। अब देखना ये है कि आने वाले चुनावों में यह योजना कितनी राजनीतिक जमीन बना पाती है और आम जनता इससे कितना लाभान्वित होती है।