China , ब्रह्मपुत्र नदी पर निर्माण कार्य शुरू, भारत-बांग्लादेश की चिंताएं बढ़ी,20 जुलाई 2025 | बीजिंग/नई दिल्ली — चीन ने तिब्बत क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र नदी (जिसे वह यारलुंग सांगपो के नाम से जानता है) पर दुनिया का सबसे बड़ा जलविद्युत बांध बनाना शुरू कर दिया है। इस परियोजना की शुरुआत शनिवार को चीन के प्रधानमंत्री ली क्यांग ने की।
12 लाख करोड़ रुपये की लागत, बिजली से 30 करोड़ लोगों को फायदा
इस मेगाप्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 167.8 अरब डॉलर (लगभग 12 लाख करोड़ रुपये) है। यह बांध अरुणाचल प्रदेश से सटे न्यिंगची शहर के पास बनाया जा रहा है।
चाइना स्टेट न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, इस परियोजना में पांच कैस्केड (सीढ़ीनुमा) जलविद्युत स्टेशन होंगे, जिससे हर साल 300 अरब किलोवाट-घंटे बिजली पैदा होगी। यह बिजली भारत की एक चौथाई आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है।
दुनिया के सबसे बड़े डैम को पीछे छोड़ेगा
फिलहाल दुनिया का सबसे बड़ा डैम थ्री गॉर्जेस डैम है, जो यांग्जी नदी, हुबेई प्रांत में स्थित है। उसकी सालाना क्षमता 88 अरब किलोवाट-घंटा है, जबकि नया ब्रह्मपुत्र डैम इससे तीन गुना ज्यादा बिजली पैदा करेगा।
भारत क्यों है चिंतित?
यह डैम एक ऐसे भूकंप संभावित क्षेत्र में बन रहा है, जहां हिमालय की विशाल घाटी में बार-बार कंपन होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्माण स्थानीय इकोसिस्टम, जैवविविधता और भौगोलिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
भारत और बांग्लादेश पहले ही बाढ़, भूस्खलन और जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हैं। इस डैम के कारण जल-प्रवाह में बदलाव आ सकता है, जिससे इन देशों में आपदाएं और बढ़ सकती हैं।
भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया
भारतीय विदेश मंत्रालय ने 3 जनवरी 2025 को एक प्रेस ब्रीफिंग में चीन के डैम निर्माण पर चिंता जताई थी। प्रवक्ता ने कहा था,
“ब्रह्मपुत्र पर बांध का निर्माण निचले राज्यों के हितों को प्रभावित नहीं करना चाहिए।”
भारत भी बना रहा है डैम
भारत भी अरुणाचल प्रदेश में ब्रह्मपुत्र नदी पर एक बड़ा बांध बना रहा है। India और China के बीच 2006 से एक विशेषज्ञ स्तरीय मैकेनिज्म (ELM) भी चल रहा है, जिसके तहत दोनों देश एक-दूसरे के साथ जल-प्रवाह डेटा साझा करते हैं।
NSA अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई दिसंबर 2024 की बैठक में भी यह मुद्दा उठा था।
पहले भी कर चुका है चीन ऐसा
2015 में China ने तिब्बत में जम हाइड्रोपावर स्टेशन की शुरुआत की थी, जिसकी लागत 1.5 अरब डॉलर थी। तब भी भारत ने चिंता जताई थी कि चीन धीरे-धीरे ब्रह्मपुत्र नदी के जलस्तर और प्रवाह पर नियंत्रण पा सकता है।
निष्कर्ष:
क्षेत्रीय संतुलन पर असर
ब्रह्मपुत्र पर यह मेगा प्रोजेक्ट ना केवल पर्यावरण के लिए चुनौती है, बल्कि यह भारत-बांग्लादेश-चीन के बीच भू-राजनीतिक तनाव भी बढ़ा सकता है। आने वाले वर्षों में यह परियोजना दक्षिण एशिया की जल राजनीति का केंद्र बन सकती है।