Alaska Summit: दुनिया की नज़रें आज अलास्का पर टिकी हुई हैं, जहां अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आमने-सामने बैठने वाले हैं। यह बैठक अंकोरेज स्थित Joint Base Elmendorf-Richardson में आयोजित हो रही है। इस बेस को इसलिए चुना गया है क्योंकि यह उच्चस्तरीय सुरक्षा और नियंत्रण के लिहाज से उपयुक्त माना जाता है।
यह शिखर सम्मेलन खास है क्योंकि अमेरिका और रूस दशकों से एक-दूसरे के रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। ऐसे में ट्रम्प और पुतिन का मिलना सिर्फ दो देशों के रिश्तों के लिहाज से ही नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और सुरक्षा के लिए भी बड़ा मायने रखता है।
Alaska Summit का एजेंडा: यूक्रेन युद्ध का समाधान
इस बैठक का मुख्य विषय यूक्रेन युद्ध में शांति का रास्ता निकालना है। पिछले ढाई सालों से जारी युद्ध ने न केवल यूरोप की सुरक्षा को हिला दिया है बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित किया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, चर्चा का सबसे विवादास्पद पहलू यह हो सकता है कि रूस को कब्ज़ा किए गए कुछ क्षेत्रों पर नियंत्रण मिल जाए और बदले में युद्धविराम लागू हो। हालांकि, इस तरह का कोई भी “क्षेत्रीय समझौता” यूक्रेन और यूरोपियन यूनियन दोनों के लिए अस्वीकार्य माना जा रहा है।
यूक्रेन और यूरोप की प्रतिक्रिया
यूक्रेन ने स्पष्ट कहा है कि उसके बिना कोई भी वार्ता वैध नहीं होगी। राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने हाल ही में बयान दिया कि “हमारी ज़मीन पर किसी और के बीच सौदेबाज़ी नहीं हो सकती।”
यूरोपियन यूनियन और नाटो (NATO) के नेता भी इस बैठक पर कड़ी नज़र रखे हुए हैं। उनका मानना है कि अगर समझौता केवल अमेरिका और रूस के बीच होता है तो यह यूक्रेन की संप्रभुता को कमजोर करेगा और पश्चिमी गठबंधन की एकता को भी चुनौती देगा।
नाटो महासचिव मार्क रूते ने कहा, “यह बैठक इस बात का परीक्षण होगी कि क्या पुतिन वास्तव में युद्ध खत्म करना चाहते हैं या यह केवल रणनीतिक दिखावा है।”
स्थानीय और वैश्विक प्रतिक्रिया
अलास्का के स्थानीय लोगों के बीच भी इस बैठक को लेकर उत्सुकता है। कुछ लोग इसे ऐतिहासिक अवसर मान रहे हैं तो कुछ आलोचना कर रहे हैं कि यह “रूस को वैधता देने का मंच” बन सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रम्प और पुतिन के बीच बनी समझ किसी भी सूरत में टिकाऊ तभी होगी जब इसमें यूक्रेन को शामिल किया जाए। अन्यथा यह सिर्फ कूटनीतिक प्रदर्शन बनकर रह जाएगा।
स्थान का प्रतीकात्मक महत्व
इस शिखर सम्मेलन का स्थान भी खास महत्व रखता है। अलास्का कभी रूस का हिस्सा था और 1867 में अमेरिका ने इसे खरीद लिया था। इसलिए, रूस और अमेरिका के शीर्ष नेताओं का यहीं मिलना एक ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक संदेश देता है।
Alaska Summit से क्या उम्मीद की जाए?
- अगर वार्ता सफल रहती है, तो यूक्रेन युद्धविराम की ओर पहला कदम उठ सकता है।
- असफलता की स्थिति में, यह बैठक रूस को और अधिक ताकतवर बनाने का बहाना बन सकती है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि असली कसौटी यह होगी कि क्या यूक्रेन को इस प्रक्रिया में शामिल किया जाता है या नहीं।
क्या है अनुमान
अलास्का में हो रहा ट्रम्प–पुतिन शिखर सम्मेलन इस समय दुनिया की सबसे चर्चित राजनीतिक घटना है। एक तरफ यह उम्मीद जगाता है कि खून-खराबे से जूझ रही दुनिया को शांति की ओर ले जाया जा सकता है, वहीं दूसरी ओर यह खतरा भी है कि यह महज़ राजनीतिक नाटक बनकर रह जाए। फैसला आने वाले घंटों और दिनों में होगा—क्या यह बैठक इतिहास रचेगी या विवादों में ही सिमट जाएगी।
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