Women’s Cricket World Cup: कुल पुरस्कार राशि,महिला क्रिकेट में नई क्रांति।

Photo of author

By Akanksha Singh Baghel

Women’s Cricket World Cup ने न केवल खेल-मंच पर रोमांच दिया बल्कि महिला क्रिकेट के वित्तीय परिदृश्य में भी बड़ा बदलाव लाया। इस लेख में हम पुरस्कार राशि के ब्योरे के साथ-साथ उन पहलुओं पर भी चर्चा करेंगे जिनका असर खिलाड़ियों, बोर्ड और स्तरीय संरचना पर पड़ेगा।


पुरस्कार राशि का विस्तार

कुल पुरस्कार पूल

ICC ने टूर्नामेंट के लिए कुल USD 13.88 million का पुरस्कार पूल घोषित किया — यह पिछले संस्करण से काफी अधिक है।

यह राशि महिला क्रिकेट के लिए अब तक की सबसे बड़ी वित्तीय प्रतिबद्धता मानी जा रही है।

विजेता, उपविजेता और सेमी-फाइनल राशियाँ

विजेता टीम: USD 4.48 million

रनर-अप: USD 2.24 million

प्रत्येक सेमीफाइनलिस्ट: USD 1.12 million

भागीदारी और ग्रुप-स्टेज बोनस

प्रत्येक टीम को भागीदारी के रूप में एक निश्चित राशि (Guaranteed amount) दी गई — लगभग USD 250,000।

ग्रुप-स्टेज की हर जीत पर अतिरिक्त बोनस; इससे समूह चरण की महत्ता भी बढ़ती है।


BCCI और राष्ट्रीय बोर्ड का योगदान (भारत केंद्रित)

ICC की राशि के अलावा, BCCI ने विजेता भारतीय टीम के लिए ₹51 करोड़ का अनुदान घोषित किया।

राज्य संघ और निजी स्पॉन्सर भी स्थानीय-स्तर पर बोनस/रिवार्ड दे सकते हैं, जिससे खिलाड़ियों की कुल आय और बढ़ेगी।


कर और वास्तविक भुगतान — क्या खिलाड़ी के हाथ में वही राशि जाएगी?

घोषित राशि Gross (कुल) होती है; खिलाड़ी और स्टाफ को मिलने वाली Net रकम कर कटौती, एजेंट फीस और अन्य कटौतियों के बाद कम हो सकती है।

खिलाड़ियों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि पुरस्कार वितरण में पारदर्शिता हो — कौन-कौन से कटौती लागू हों और किस तरह वितरित किया जाएगा (खिलाड़ियों के बीच समान वितरण, कोच/स्टाफ हिस्से आदि)।

सुझाव: बोर्ड को कर सलाह व पारदर्शी पॉलिसी सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि खिलाड़ी सही-सलाह लेकर अपनी फाइनेंस प्लानिंग कर सकें।


स्पॉन्सरशिप, ब्रांडिंग और मीडिया प्रभाव

बड़ी पुरस्कार राशि ने ब्रांड्स का ध्यान महिला क्रिकेट की ओर और तेज कर दिया है।

टेलीविज़न/स्ट्रीमिंग राइट्स, विज्ञापन और मर्चेंडाइज़िंग से मिलने वाली आय भी बढ़ने के अवसर हैं।

खिलाड़ी-ब्रांड साझेदारी, अब और प्रॉफिटेबल होंगी — खासकर टूर्नामेंट के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली खिलाड़ियों के लिए।


घरेलू संरचना और लीग पर असर

पुरस्कार राशि व ध्यान बढ़ने से घरेलू T20/50-over लीगों की वैल्यू भी बढ़ेगी।

राज्य-स्तर पर अधिक अनुचितता कम करने के लिए संरचनात्मक सुधार (क्वालीफाइंग टूर्नामेंट, ट्रांसफर नीति, स्टेट-सेन्ट्रल ग्रांट) जरूरी हैं।

सुझाव: एक मजबूत घरेलू सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट और लीग-प्रीमियम से खिलाड़ियों का करियर स्थिर होगा।


ग्रासरूट और युवा विकास पर प्रभाव

आर्थिक प्रोत्साहन से स्थानीय कोचिंग सेंटर, अकादमियाँ और महिला-खेल कार्यक्रमों में निवेश बढ़ेगा।

स्कूल-स्तर और कॉलेज-स्तर पर स्कॉलरशिप/ट्रायल प्रोग्राम्स से प्रतिभा का निरंतर प्रवाह सुनिश्चित होगा।

सुझाव: ICC और राष्ट्रीय बोर्ड को मिलकर ‘युवा महिला क्रिकेट कोष’ बनाना चाहिए, ताकि टैलेंट की पहचान व पोषण हो सके।


खिलाड़ियों पर व्यक्तिगत प्रभाव — वित्तीय सुरक्षा और करियर विकल्प

बड़ी पुरस्कार राशि खिलाड़ियों को लंबी अवधि की वित्तीय सुरक्षा दे सकती है (खासकर उन देशों के लिए जहाँ खिलाड़ी सैलरी कम थी)।

अधिक खिलाड़ी अब पूर्णकालिक क्रिकेट का चयन कर पाएंगी, जिससे खेल का स्तर प्राकृतिक रूप से ऊँचा होगा।

परन्तु: व्यक्तिगत रूप से वित्तीय सलाह, निवेश मार्गदर्शन और कर-प्रबंधन की सुविधा प्रदान करनी चाहिए।


पारदर्शिता और वितरण मॉडल — क्या सुधार जरूरी हैं?

पुरस्कार घोषणा के बाद यह स्पष्ट होना चाहिए कि रकम किस अनुपात में खिलाड़ियों, कोच, सपोर्ट-स्टाफ और संघ को दी जाएगी।

बेहतर मॉडल: ICC राशि सीधे राष्ट्रीय बोर्ड को दे और बोर्ड एक पारदर्शी नियमावली के साथ वितरण करे (उदा. 70% खिलाड़ी, 15% कोच/स्टाफ, 15% विकास/इन्फ्रास्ट्रक्चर)।

खिलाड़ी यूनियनों/प्रतिनिधियों को बातचीत में शामिल किया जाना चाहिए ताकि वितरण निष्पक्ष और टिकाऊ हो।


सामाजिक-आर्थिक प्रभाव और लैंगिक समानता

यह वित्तीय बढ़ोतरी महिलाओं के खेलों के बीच आर्थिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम है।

ज्यादा पुरस्कार और दृश्यता से समाज में महिलाओं के खेल को वैधता मिलेगी — परिवारों व संस्थानों का समर्थन बढ़ेगा।

साथ ही, मीडिया कवरेज में सुधार और समान प्रसारण अधिकार इस दिशा को और मजबूत करेंगे।


चुनौतियाँ और जोखिम बिंदु

ICC Women’s Cricket World Cup 2025

बड़ी राशि शॉर्ट-टर्म उत्साह लाए, पर अगर इसे सिस्टमेटिक रूप से नहीं संभाला गया तो प्रभाव स्थायी नहीं रहेगा।

कर और एजेंसी शुल्क के कारण खिलाड़ी की जेब में कम रकम पहुंच सकती है — पारदर्शिता जरूरी।

छोटे बोर्ड/देशों के लिए इन बड़ी रकम का असर सीमित रह सकता है; इसलिए ICC को वैश्विक एन्बलिंग रणनीति अपनानी होगी

आगे के ठोस कदम
  1. पारदर्शी वितरण नीति: राष्ट्रीय बोर्ड्स स्पष्ट वितरण चार्ट जारी करें।
  2. कर और वित्तीय सहायता: खिलाड़ियों के लिए कर सलाह और वित्तीय परामर्श सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ।
  3. Grassroots फंडिंग: अतिरिक्त राशि का एक हिस्सा युवा विकास और अकादमियों में आवंटित हो।
  4. लीग-संरचना मजबूत करें: घरेलू लीगों में निवेश बढ़ाकर खिलाड़ी को नियमित कमाई का मौका दें।
  5. स्पॉन्सरशिप और प्रसारण अधिकार: महिला क्रिकेट के लिए विशेष ब्रांड-पैकेज और प्रसारण समझौते प्रोत्साहित करें।

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.