Constitution Day, हर साल 26 नवंबर को भारत में संविधान दिवस मनाया जाता है। यह दिन हमें भारतीय लोकतंत्र की आत्मा—संविधान—और उसके निर्माण में शामिल सदस्यों की दूरदर्शिता की याद दिलाता है। 2015 में केंद्र सरकार ने इस दिन को औपचारिक रूप से संविधान दिवस घोषित किया ताकि नागरिकों को संविधान के प्रति जागरूक किया जा सके।
संविधान निर्माण: प्रारूप समिति और ड्राफ्ट कमेटी की भूमिका
भारत के संविधान को तैयार करने के लिए 29 अगस्त 1947 को संविधान सभा ने प्रारूप समिति (Drafting Committee) का गठन किया। इसके अध्यक्ष थे डॉ. भीमराव अंबेडकर—जिन्हें “पहले समान” कहा जाता है, यानी अध्यक्ष होने के बावजूद वे खुद को समिति के अन्य सदस्यों के बराबर मानते थे। समिति के अन्य प्रमुख सदस्य थे:
- कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी
- मोहम्मद सादुल्लाह — विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए
- अल्लादि कृष्णस्वामी अय्यर
- गोपाळ स्वामी अय्यंगार
- एन. माधव राव — बाद में इस्तीफा दिया
- टी. टी. कृष्णमाचारी
इसके अलावा, बी. एन. राव (B.N. Rau) को समिति का मुख्य संवैधानिक सलाहकार नियुक्त किया गया था।
इन्हीं सभी की संयुक्त मेहनत ने भारत के संविधान का प्रारूप तैयार किया।
संविधान निर्माण प्रक्रिया: मुख्य तिथियाँ
भारत का संविधान लिखने की यात्रा बेहद विस्तृत और ऐतिहासिक थी। प्रमुख चरण इस प्रकार हैं:
29 अगस्त 1947
प्रारूप समिति का गठन।
26 नवंबर 1949
ड्राफ्ट तैयार होकर संविधान सभा के समक्ष प्रस्तुत किया गया और संविधान अपनाया गया।
26 जनवरी 1950
संविधान लागू हुआ और भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बन गया।
कुल समय लगा: 2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन।
संविधान सभा: संरचना, चुनाव और विशेषताएँ
संविधान निर्माण का केंद्र बिंदु थी—संविधान सभा।
संविधान सभा के अध्यक्ष
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद
सदस्यों की कुल संख्या
•389 सदस्य (विभाजन से पहले)
- इसमें ब्रिटिश भारत और रियासतों के सदस्य शामिल थे।
299 सदस्य (विभाजन के बाद भारत में शेष)
जिनमें शामिल थे:
- 229 चुने हुए सदस्य
- 70 मनोनीत सदस्य
- 15 महिलाएं
- 26 अनुसूचित जाति (SC) के सदस्य
- 33 अनुसूचित जनजाति (ST) के सदस्य
चुनाव कैसे हुए?
संविधान सभा के सदस्य वयस्क मताधिकार आधारित नहीं थे, बल्कि
- उन्हें प्रांतीय विधानसभाओं के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से चुना गया था।
- ये चुनाव जुलाई 1946 में आयोजित हुए थे।
संविधान की विशेषताएँ
भारतीय संविधान दुनिया का सबसे विस्तृत लिखित संविधान है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएँ:
- संघीय ढाँचा — केंद्र और राज्य सरकारों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन।
- स्वतंत्र न्यायपालिका — सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करते हैं।
- मौलिक अधिकार और कर्तव्य — नागरिकों को स्वतंत्रता, समानता और गरिमा की गारंटी।
- धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय — हर नागरिक को समान अवसर और न्याय का अधिकार।
Constitution Day आज क्यों महत्वपूर्ण है?
आज के दौर में जब सामाजिक, राजनीतिक और तकनीकी बदलाव तेज़ी से हो रहे हैं, संविधान एक मार्गदर्शक मूल्य-प्रणाली के रूप में हमारे लोकतंत्र को स्थिरता देता है।
यह दिवस Constitution Day, हमें याद दिलाता है कि—
अधिकारों के साथ कर्तव्य भी उतने ही आवश्यक हैं
और
लोकतंत्र तभी मजबूत रहता है जब उसमें नागरिकों की जागरूक भागीदारी हो।