Unnao Rape Case: न्यायिक प्रक्रिया, सजा और अब सुप्रीम कोर्ट ने बेल पर लगाई रोक, क्या है पूरी कहानी

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By Puspraj Singh

Unnao Rape Case: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से जुड़ा रेप केस देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल है। इस मामले ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल मचाई, बल्कि न्याय व्यवस्था, पीड़िता की सुरक्षा और सत्ता के दुरुपयोग जैसे गंभीर सवाल भी खड़े किए। वर्ष 2017 में शुरू हुआ यह मामला कई मोड़ों से गुजरते हुए दिल्ली की अदालतों तक पहुंचा।

क्या है Unnao Rape Case का पूरा मामला

पीड़िता ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2017 में तत्कालीन बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने उसके साथ बलात्कार किया। पीड़िता का यह भी आरोप था कि शिकायत करने के बाद उसे और उसके परिवार को लगातार धमकियां दी गईं। Unnao Rape Case का पूरा मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं होने के कारण यह केस राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया।

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस केस की सुनवाई उत्तर प्रदेश से स्थानांतरित कर दिल्ली कर दी। साथ ही, जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्षा दी जाए।

ट्रायल कोर्ट का फैसला

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में CBI की विशेष अदालत ने 16 दिसंबर 2019 को कुलदीप सिंह सेंगर को रेप का दोषी ठहराया। इसके बाद 20 दिसंबर 2019 को अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह अपराध न केवल पीड़िता के खिलाफ है, बल्कि समाज और कानून व्यवस्था पर भी गहरा आघात है।

Unnao Rape Case और अन्य मामलों में सजा

उन्नाव रेप केस से जुड़े अन्य मामलों में भी कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी ठहराया गया। इनमें पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत, गवाहों को डराने-धमकाने और सड़क दुर्घटना से जुड़े मामले शामिल हैं। इन मामलों में अलग-अलग सजाएं सुनाई गईं, जिससे सेंगर की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गईं।

दिल्ली हाई कोर्ट में बेल विवाद

सालों जेल में बिताने के बाद कुलदीप सिंह सेंगर ने दिल्ली हाई कोर्ट में सजा निलंबन और जमानत के लिए याचिका दाखिल की। दिल्ली हाई कोर्ट ने कुछ कानूनी आधारों पर उन्हें बेल देने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि वह कुछ धाराओं के तहत “लोक सेवक” की परिभाषा में नहीं आते और उन्होंने लंबा समय जेल में बिता लिया है। हालांकि, इस आदेश पर देशभर में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

सुप्रीम कोर्ट ने बेल पर लगाई रोक

दिल्ली हाई कोर्ट के बेल आदेश को चुनौती देते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी और स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय से पहले बेल लागू नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सभी कानूनी पहलुओं की गहराई से समीक्षा जरूरी है।

क्यों अहम है Unnao Rape Case

उन्नाव रेप केस को भारतीय न्याय व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जाता है। यह मामला दिखाता है कि जब पीड़िता को न्याय मिलने में देरी होती है, तब न्यायपालिका का हस्तक्षेप कितना जरूरी हो जाता है। साथ ही, यह केस सत्ता में बैठे लोगों की जवाबदेही और कानून के समान लागू होने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

फिलहाल उन्नाव रेप केस से जुड़े कई कानूनी पहलू सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन हैं। देश की नजरें इस पर टिकी हैं कि अंतिम रूप से न्यायालय क्या फैसला देता है। यह मामला न केवल पीड़िता के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए न्याय और विश्वास की कसौटी बन चुका है।

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