UP Draft Voter LIST 2026, उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (Special Intensive Revision–SIR) के तहत नई ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी हुई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के मुताबिक, जारी मसौदा सूची में कुल 15.44 करोड़ मतदाताओं में से 12.55 करोड़ मतदाता शामिल हैं, जबकि लगभग 2.89 करोड़ नाम (18.7%) नई सूची में नहीं पाए गए। निर्वाचन आयोग के अनुसार ड्राफ्ट सूची में अब 12.55 करोड़ मतदाता बचे हैं और यह संख्या पिछले चुनाव से उपलब्ध पुरानी सूची का 81.3% हिस्सा है। इस बीच दो जनवरी से छह फरवरी 2026 तक मतदाताओं को अपने नाम-जांचने व आपत्तियां दर्ज कराने का मौका दिया गया हैं।
प्रमुख आँकड़े और कारण
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत वोटर लिस्ट की शुद्धि प्रक्रिया के दौरान दो करोड़ 89 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं��। चयनित नामों में सबसे बड़े वर्ग रूप में अनुपस्थित या स्थानांतरित मतदाता (लगभग 2.17 करोड़) हैं, जबकि मृत पाए गए मतदाताओं की संख्या 46.23 लाख रही��। इसके अलावा 25.47 लाख मतदाताओं के नाम सूची में दोहरे दर्ज पाए गए (डुप्लीकेट) और लगभग 7.57 लाख मतदाताओं ने नया नामांकन फार्म नहीं भरा��। निर्वाचन आयोग का स्पष्ट उद्देश्य कोई भी योग्य मतदाता सूची से छूट न जाए और सूची में किसी तरह की गड़बड़ी न रहे�। इसके तहत BLO (बूट स्तर अधिकारी) घर-घर जाकर मतदाता सत्यापन अभियान चला रहे हैं, जहां मतदाता फॉर्म भरकर अपनी जानकारी अपडेट करा सकते हैं।
कटे गए नामों की संख्या से यह भी देखा गया है कि बड़े शहरी केंद्रों में सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है। सबसे ज्यादा नाम लखनऊ में हटाए गए हैं (लगभग 12.0 लाख), उसके बाद प्रयागराज में 11.56 लाख, कानपुर नगर में 9.02 लाख, आगरा में 8.36 लाख और गाजियाबाद में 8.18 लाख नाम कटे हैं। इन जिलों में मतदाता सूची से नाम काटने की दर राज्य औसत से बहुत ऊपर है। आमतौर पर बड़े शहरों में जनसंख्या स्थिर न होने के कारण अनुपस्थित/स्थानांतरित और डुप्लीकेट रिकॉर्ड अधिक पाए जाते हैं, इसीलिए शहरी इलाकों में यह प्रक्रिया सबसे अधिक प्रभावशाली साबित हुई है।
प्रक्रिया और सत्यापन अभियान
मतदाता सूची के इस पुनरीक्षण अभियान में दिसंबर 2025 में शुरू होकर सभी जिलों में घर-घर मतदाता सत्यापन (door-to-door enumeration) किया गया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी रिणवा ने बताया कि चुनाव आयोग द्वारा घर-घर जाकर मतदाता फॉर्म 6 भरे गए, जिसमें मतदाताओं ने अपना विवरण दर्ज कराया। शुरू में 11 दिसंबर तक निर्धारित यह अभियान 26 दिसंबर तक बढ़ाया गया, क्योंकि कई जिलों में सतह पर आने वाले अनुपस्थित नामों की संख्या अधिक थी। इस दौरान हर पोलिंग बूथ पर मतदाताओं की अधिकतम संख्या 1200 तय की गई, जिसके चलते उत्तर प्रदेश में करीब 15,030 नए मतदान बूथ बनाए गए ताकि बूथ पर भीड़ न हो। इन तैयारियों के बाद 6 जनवरी 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की गई।
जो मतदाता अपनी जानकारी ड्राफ्ट सूची में नहीं देखते या गलती पाते हैं, वे आयोग की वेबसाइट (ceouttarpradesh.nic.in) से नाम देख सकते हैं और सुधार हेतु ऑनलाइन/ऑफलाइन फॉर्म भर सकते हैं। जिनका नाम सूची में नहीं है, उन्हें फार्म-6 भरना होगा और जरूरी दस्तावेज संलग्न करना होग। आपत्ति दर्ज कराने के लिए फार्म-7 तथा नाम/पते में सुधार के लिए फार्म-8 उपलब्ध हैं।
आगामी समयसीमा
ड्राफ्ट सूची की प्रकाशन तिथि 6 जनवरी 2026 से अब तक एक माह यानी 6 फरवरी 2026 तक मतदाताओं के दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी। इस अवधि में आयोग द्वारा मिली आपत्तियों की सुनवाई की जाएगी। छंटे नाम वाले मतदाता 27 फरवरी तक ईआरओ/एईआरओ से संपर्क कर सकते हैं; केंद्रीय निर्वाचन आयोग द्वारा स्वीकृत 12 प्रमाण-पत्रों में से किसी एक के साथ आवेदन करना अनिवार्य है (आधार अकेले पर्याप्त नहीं है)। अंततः 6 मार्च 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। अंतिम सूची के बाद भी मतदाता एक माह तक आपत्ति दर्ज कर सकेंगे, लेकिन अब नाम काटने की प्रक्रिया केवल निर्वाचन अधिकारी या नोटिस के माध्यम से होगी।
चुनावों पर असर
UP Draft Voter LIST 2026 निर्वाचन आयोग का कहना है कि यह पूर्णतः पारदर्शिता बढ़ाने और त्रुटि-रहित मतदाता सूची तैयार करने की कार्रवाई है। आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर व्यापक मतदाता सूची को अपडेट करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे फर्जी या डुप्लीकेट वोटरों का खतरा कम होगा और चुनाव निष्पक्षता बढ़ेगी। हालांकि विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया को लेकर असंतोष जताया है। यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने SIR को जल्दबाजी करार दिया है और कहा है कि इतने बड़े राज्य में एक माह की समयावधि अपर्याप्त थी। वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कुछ क्षेत्रों में वैध कटे नाम बहाल करने की माँग की है। कुल मिलाकर, निर्वाचन आयोग इस बदलाव को आगामी चुनावों में भरोसा बढ़ाने वाला कदम मान रहा है, जबकि राजनीतिक दल इसे चुनावी प्रक्रिया से जोड़कर देख रहे हैं।