MALEGAON BLAST: मालेगांव बम ब्लास्ट में NIA ( राष्ट्रीय सुरक्षा एजेसीं ) की कोर्ट ने 17 साल बाद के बाद अपना फैसला सुनाया. कोर्ट ने इस मामले के सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया है. सबूतों के आभाव में सभी आरोपी हुये बरी. इस मामले में पूर्व भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित समेत सात आरोपी शामिल थे.
कब हुआ था MALEGAON BLAST
मालेगांव महाराष्ट्र के मुंबई से लगभग 200 किलोमीटर दूर एक मुस्लिम बहुल इलाका है. जहां 29 सितम्बर 2008 को एक बम ब्लास्ट हुआ था. इस ब्लास्ट में 6 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि लगभग 100 से अधिक लोग घायल हो गये थे. यह धमाका मालेगांव की एक मस्जिद के पास खड़ी मोटरसाइकिल में हुआ था.
NIA तक कैसे पहुंचा MALEGAON BLAST केस
शुरुआत में इस केस की जांच ATS कर रही थी. लेकिन 2011 में इसकी जांच की जिम्मेदारी NIA को सौंप दी गई. NIA की कोर्ट ने धमाके के लगभग 17 साल बाद 31 जुलाई 2025 को अपना फैसला सुनाया. आरोपियों के खिलाफ कोई सबूत न मिलने के कारण कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया.
कोर्ट ने क्या कहा
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि श्रीकांत पुरोहित के घर पर विस्फोटकों का भंडार है. जांच करते समय जांच अधिकारी ने घटनास्थल का कोई स्केट भी नहीं बनाया गया था. घटनास्थल से फिंगरप्रिंट डंप डेटा या कुछ भी नहीं लिया गया था. सैंपल भी सही से नहीं थे इसलिए रिपोर्ट को भरोसेमंद नही माना जा सकता है.
प्रॉसिक्यूशन यह साबित नहीं कर पाया कि मोटरसाइकिल में ही रखा था बम
कोर्ट ने अपने फैसले में आगे कहा कि विस्फोट में कथित रूप से शामिल मोटरसाइकिल का चेचिस नंबर भी साफ नहीं था. प्रॉसिक्यूशन यह साबित नहीं कर सका कि धमाके के ठीक पहले वह बाइक साध्वी प्रज्ञा के पास था. प्रॉसिक्यूशन ने यह तो साबित कर दिया कि MALEGAON BLAST हुआ था. लेकिन यह साबित नहीं कर पाये कि बम मोटरसाइकिल में ही रखा था. इस मामले में UAPA नहीं लगाया जा सकता है.
प्रज्ञा ठाकुर ने क्या कहा
प्रज्ञा ठाकुर ने कोर्ट के फैसले को भगवा की जीत बताया है. उन्होने कहा कि मैने शुरू में ही कहा था कि जिन्हे भी जांच के लिए बुलाया जाता है उसके पीछे कोई आधार होना चाहिए. मुझे जांच के लिए बुलाकर गिरफ्तार किया गया. कई बार प्रताड़ित किया गया. इसमें मेरा पूरा जीवन बर्बाद हो गया. आज भगवा की जीत हुई है.
पीड़ितों को मआवजा
अदालत ने अपने फैसले में पीड़ितों को मआवजा देने का भी आदेश दिया. कोर्ट ने इस मामले में अपना दुख जताया. उन्होने कहा कि इसकी वजह से जिनका नुकसान हुआ उसे भरा नहीं जा सकता है. लेकिन इस धमाके में मारे गये परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है.
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