Bihar Assembly Elections 2025: बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो गया है। चुनाव आयोग ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि राज्य में चुनाव दो चरणों में — 6 और 11 नवंबर 2025 को कराए जाएंगे। वहीं मतगणना 15 नवंबर को होगी। इसके साथ ही राज्य में आचार संहिता (Model Code of Conduct) तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
दो चरणों में Bihar Assembly Elections 2025 का मतदान, सुरक्षा पर सख्त निगरानी
मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने बताया कि पहले चरण में 18 जिलों की 124 सीटों पर मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में शेष 119 सीटों पर वोट डाले जाएंगे।
चुनाव आयोग ने कहा है कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष इंतज़ाम किए गए हैं। संवेदनशील और नक्सल प्रभावित इलाकों में केंद्रीय सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की जाएगी।
इसके अलावा, सभी बूथों पर EVM और VVPAT का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है ताकि मतदान प्रक्रिया पारदर्शी और विश्वसनीय रहे।
एनडीए का नारा – “विकसित बिहार, सबका विश्वास”
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपना चुनाव अभियान तेज कर दिया है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में जेडीयू (JDU), भाजपा (BJP), हम (HAM) और लोजपा (LJP) इस बार “विकसित बिहार – सबका विश्वास” के नारे के साथ मैदान में है।
एनडीए नेताओं का कहना है कि पिछले दो दशकों में राज्य में सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुए हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा कि “डबल इंजन की सरकार ने बिहार को विकास की पटरी पर लाया है, अब हमारा लक्ष्य है ‘विकसित बिहार 2040’।”
महागठबंधन का पलटवार – “परिवर्तन ही विकल्प”
वहीं विपक्षी महागठबंधन (राजद, कांग्रेस, वाम दल आदि) ने सरकार पर बेरोज़गारी, महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर निशाना साधा है।
तेजस्वी यादव ने कहा, “जनता इस बार बदलाव चाहती है। 20 साल में नीतीश कुमार और भाजपा ने बिहार को पीछे धकेल दिया है। अब युवाओं को रोजगार और किसानों को सम्मान चाहिए।”
कांग्रेस की ओर से अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि यह चुनाव विकास बनाम वादाखिलाफी का मुकाबला होगा।
सोशल मीडिया पर तेज हुआ डिजिटल प्रचार
2025 का यह चुनाव पारंपरिक रैलियों के साथ-साथ डिजिटल चुनाव अभियान के लिए भी याद किया जाएगा।
भाजपा ने ‘विकसित बिहार ऐप’ लॉन्च किया है, जिसके ज़रिए पार्टी जनता से सीधे संवाद कर रही है।
वहीं राजद ने “परिवर्तन बिहार अभियान” नाम से एक ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म शुरू किया है, जहां युवा रोजगार और शिक्षा से जुड़े मुद्दे उठा सकते हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार का चुनाव पहली बार वोट देने वाले 2.5 करोड़ मतदाताओं पर निर्णायक असर डालेगा।
जातीय समीकरणों पर टिकी निगाहें
बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं।
NDA अति पिछड़ा वर्ग (EBC), महादलित और महिला मतदाताओं पर फोकस कर रही है, जबकि महागठबंधन यादव-मुस्लिम (MY) समीकरण को मज़बूत करने में जुटा है।
छोटे दल जैसे विकासशील इंसान पार्टी (VIP) और रालोसपा भी इस बार मुकाबले को दिलचस्प बना सकते हैं।
चुनाव आयोग की Bihar Assembly Elections 2025 को लेकर सख्त अपील
चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से आचार संहिता के पालन की अपील की है। नकद, शराब या उपहार वितरण पर निगरानी के लिए विशेष फ्लाइंग स्क्वॉड बनाए गए हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि हर मतदाता निडर होकर मतदान करे और बिहार में निष्पक्ष व शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न हों।”
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 राज्य की राजनीति का अगला बड़ा अध्याय साबित हो सकता है।
जहां नीतीश कुमार अपनी विकास यात्रा को जनता के सामने रखकर फिर से सत्ता में वापसी की कोशिश करेंगे, वहीं तेजस्वी यादव ‘परिवर्तन’ के नारे के साथ जनता को नए विकल्प का भरोसा दिलाने में जुटे हैं।
अब देखना यह है कि 15 नवंबर को जनता किसे अपना जनादेश सौंपती है — विकास के पुराने मॉडल को या नए बदलाव के वादे को।