Diwali 2025: तिथि, महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त जानिए

Photo of author

By Akanksha Singh Baghel

Diwali, जिसे दीपावली भी कहा जाता है, भारत का सबसे उज्ज्वल और पवित्र पर्व है। यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश की और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। हर वर्ष की तरह इस बार भी लोग घरों को सजाने, दीप जलाने और माँ लक्ष्मी की पूजा करने के लिए उत्सुक हैं।


दिवाली 2025 कब है?

शास्त्रों के अनुसार दिवाली कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2025 में अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को आरंभ होकर 21 अक्टूबर की संध्या तक रहेगी।

क्योंकि 20 अक्टूबर की शाम (प्रदोष काल) में अमावस्या विद्यमान रहेगी, इसलिए उसी दिन लक्ष्मी पूजन करना अधिक शुभ माना गया है। इस वर्ष दिवाली 20 अक्टूबर 2025, सोमवार को मनाई जाएगी।


दिवाली की तिथि और शुभ मुहूर्त

अमावस्या तिथि आरंभ: 20 अक्टूबर दोपहर लगभग 3:45 बजे

अमावस्या तिथि समाप्ति: 21 अक्टूबर शाम लगभग 5:55 बजे

लक्ष्मी पूजन मुहूर्त: 20 अक्टूबर शाम 7:00 बजे से 8:15 बजे तक

प्रदोष काल: सूर्यास्त से लेकर लगभग दो घंटे तक

इस काल में पूजा करना अत्यंत शुभ और फलदायक माना गया है। इसलिए, घर में दीप प्रज्ज्वलन और लक्ष्मी-गणेश पूजन इसी समय करें।


दिवाली का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

दिवाली केवल दीपों का पर्व नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागृति का संदेश देती है।

  1. अंधकार पर प्रकाश की जीत:
    यह पर्व सिखाता है कि जीवन में ज्ञान ही सच्चा प्रकाश है। जब मन में सद्भाव आता है, तो अंधकार मिट जाता है।
  2. रामायण से संबंध:
    इस दिन भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूर्ण कर अयोध्या लौटे थे। अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया। उसी दिन को दीपावली कहा गया।
  3. माँ लक्ष्मी की उपासना:
    दिवाली की रात को माँ लक्ष्मी का पृथ्वी पर आगमन होता है। जो घर स्वच्छ और प्रकाशित होता है, वहाँ लक्ष्मी का वास होता है।
  4. नरकासुर वध का संकेत:
    दिवाली से एक दिन पहले नरक चतुर्दशी मनाई जाती है, जब भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था। यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।

दिवाली से जुड़े पाँच दिन

Diwali केवल एक दिन का नहीं बल्कि पाँच दिनों का उत्सव है। प्रत्येक दिन का अपना अलग अर्थ और महत्व है।

दिवाली के पांचदिवसीय महोत्सव के नाम

दिन नामविशेषता
पहला दिनधनतेरसधन, आरोग्य और समृद्धि के लिए पूजन किया जाता है
दूसरा दिननरक चतुर्दशी / छोटी दिवालीनकारात्मकता और बुराई के नाश का प्रतीक।
तीसरा दिनलक्ष्मीपूजन/ मुख्य दिवालीमहालक्ष्मी और गणेश की आराधना का शुभ दिन
चौथा दिनगोवर्धन पूजाभगवान श्री कृष्णा की गोवर्धन लीला को याद करते हुए पूजन किया जाता है।
पांचवां दिनभाईदूज भाई बहनों के प्रेम के प्रतीक का पर्व ।

दिवाली की पूजा विधि
  1. घर की सफाई करें।
    दिवाली से पहले घर, आंगन और मंदिर को अच्छी तरह साफ करें।
  2. दीप सजाएँ।
    शाम के समय तेल के दीपक जलाएँ और घर के हर कोने को रोशन करें।
  3. लक्ष्मी-गणेश की पूजा करें।
    प्रदोष काल में दीप जलाकर लक्ष्मी-गणेश की आराधना करें।
  4. मंत्र-जाप और आरती।
    “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जाप शुभ होता है।
  5. दान और सेवा।
    दिवाली पर जरूरतमंदों की सहायता करें — यह सच्चा पुण्य है।

क्या है दिवाली मानने का वास्तविक अर्थ।

Diwali हमें बताती है कि सच्चा प्रकाश केवल दीपों से नहीं, बल्कि हमारे कर्मों और विचारों से फैलता है।
इस दिन द्वेष, ईर्ष्या और क्रोध को त्याग कर प्रेम, करुणा और दया का दीप जलाना चाहिए।

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.