Harish Joshi: आजादी के जीनियस, राजस्थान एकीकरण के अनसुने महानायक की गाथा

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By Akanksha Singh Baghel

भारत की स्वतंत्रता संग्राम की गाथाओं में कुछ ऐसे नायक भी हैं जिनके योगदान पर समय की धूल जम गई है, लेकिन जिनकी विचारधारा और कार्य आज भी प्रेरणा देते हैं। उन्हीं में से एक हैं कॉमरेड Harish joshi — स्वतंत्रता सेनानी, क्रांतिकारी चिंतक, दार्शनिक, लेखक, पत्रकार, वकील, समाज सुधारक और राजस्थान एकीकरण के प्रमुख सूत्रधार।

Harish joshi न केवल एक बेहतरीन विचारक थे, बल्कि इतने बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे कि उनके जीवन को एक फ्रेम में बांधना मुश्किल है। वे ऐसे व्यक्ति थे जिनके मार्गदर्शन में कई नामचीन नेता, लेखक और क्रांतिकारी आगे बढ़े।


शुरुआती जीवन और क्रांतिकारी सोच का जन्म

सन 1941 में उच्च शिक्षा के लिए हरीश जोशी लखनऊ पहुंचे। साहित्य में गहरी रुचि के चलते उनकी मुलाकात मशहूर क्रांतिकारी लेखक यशपाल से हुई। यशपाल का मानना था कि जोशी साहित्य के क्षेत्र में बड़ी पहचान बना सकते हैं, लेकिन उन्होंने राजनीति का रास्ता चुना और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से कूद पड़े।


राजस्थान एकीकरण में अहम भूमिका

स्वतंत्र भारत के निर्माण में राजस्थान के एकीकरण का ऐतिहासिक कार्य हरीश जोशी की सूझबूझ और रणनीति के बिना अधूरा रहता। यहां तक कि सरदार वल्लभभाई पटेल के सचिव वीपी मेनन ने भी उनके सुझावों को गंभीरता से अपनाया।


पत्रकारिता में मिशन और संघर्ष

हरीश जोशी न केवल राजनीति में सक्रिय थे बल्कि खोजपूर्ण और मिशनरी पत्रकारिता के भी स्तंभ थे। उन्होंने अंग्रेजी पत्रकारिता को राजस्थान और दिल्ली में नई ऊंचाई दी।

  • 1946 में महान विचारक एम.एन. रॉय से उन्होंने अंग्रेजी का अंतरराष्ट्रीय अख़बार Vanguard खरीदा।
  • इसके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में प्रख्यात कवि अज्ञेय भी शामिल थे।
  • बाद में वे Don Press खरीदना चाहते थे और इसके लिए कराची तक गए, लेकिन प्रेस में आग लगने से सपना अधूरा रह गया।
  • उनका विज़न था कि Vanguard का नाम बदलकर Asian Times रखा जाए और इसे एशिया का सबसे बड़ा मुखपत्र बनाया जाए।

उन्होंने 1949 में Rajputana Herald और 1950 में Spokesman Weekly जैसे अख़बार भी शुरू किए।


विचारधारा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता

हरीश जोशी मार्क्सवादी विचारों से प्रेरित थे, लेकिन किसी पार्टी के स्थायी सदस्य नहीं बने। वे Redical Democratic Party के समर्थक, लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रबल पक्षधर थे। उनका मानना था कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता ही असली क्रांति की नींव है।


साहित्यिक योगदान

Harish Joshi ने कई महत्वपूर्ण किताबें लिखीं, जिनमें से कुछ प्रकाशित हुईं और कुछ अप्रकाशित रह गईं:

  1. Social Man and Inhuman Society (अंग्रेजी)
  2. सुकरात: व्यक्ति और विचार
  3. घनराजिका (काव्य संग्रह, दुर्लभ)
  4. Heroes of France (अंग्रेजी, अप्रकाशित)
  5. Labour Movement in India (अंग्रेजी, अप्रकाशित)
  6. Challenges to Bertrand Russell and Social Thinking (अंग्रेजी, अप्रकाशित)
  7. कृषि सेवा और सहकारिता: क्यों और कैसे?

व्यक्तित्व के कई आयाम

जैसा कि निदा फाज़ली ने कहा, “हर आदमी में होते हैं दस-बीस आदमी।” जोशी का व्यक्तित्व भी ऐसा ही था — दार्शनिक, नेता, पत्रकार, कवि, और मजदूरों के साथी।

उनकी वकालत का अंदाज भी निराला था। मशहूर कवि मरुधर मृदुल ने कहा था — “जोशी एक ऐसे वकील थे जो कभी कोर्ट नहीं गए, लेकिन कभी केस नहीं हारे।”


अंतिम समय और विरासत

मई दिवस की मध्यरात्रि को यह अद्वितीय जीनियस इस दुनिया से विदा हो गया। राजस्थान के मजदूर आंदोलन, प्रगतिशील राजनीति और साहित्य में उनका योगदान अमिट है। उनकी सोच और विचार आज भी नए भारत के निर्माण में मार्गदर्शन कर सकते हैं।

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