India’s PSLV mission fails: 15 सैटेलाइट्स ले जा रहा ISRO रॉकेट रास्ते से भटका

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By Akanksha Singh Baghel

भारत के 15 सैटेलाइट्स मिशन में तकनीकी गड़बड़ी, रॉकेट रास्ते से भटका — ISRO ने क्या कहा?


India’s PSLV mission fails, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO के PSLV-C62 मिशन से 15 सैटेलाइट्स को एक साथ अंतरिक्ष में भेजने के प्रयास में गंभीर तकनीकी गड़बड़ी सामने आई है। मिशन के तीसरे चरण के दौरान रॉकेट के फ्लाइट पाथ में अनपेक्षित विचलन देखा गया, जिसके कारण सैटेलाइट्स को निर्धारित कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका।


PSLV-C62 मिशन — क्या था लक्ष्य?
  • इसरो ने PSLV-C62 को 12 जनवरी 2026 को सुबह 10:17 बजे श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया।
  • मिशन का मुख्य पेलोड EOS-N1 (जिन्हें अन्वेषा नाम दिया गया है) था — यह एक उन्नत अर्थ ऑब्ज़र्वेशन सैटेलाइट है जिसे DRDO द्वारा विकसित किया गया है।
  • इसके अलावा 15 अन्य सह-सहभागी सैटेलाइट्स भी मिशन में शामिल थे, जिनमें अंतरराष्ट्रीय और भारतीय निजी कंपनियों के पेलोड शामिल थे।
तकनीकी गड़बड़ी — क्या हुआ?

ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन ने बताया कि रॉकेट का लॉन्च प्रारंभिक दौर तक बिल्कुल सामान्य था, लेकिन तीसरे चरण (Third Stage) के बाद फ्लाइट पाथ में बदलाव देखा गया। इससे रॉकेट अपने निर्धारित कक्ष से भटक गया और सैटेलाइट्स को सफलतापूर्वक स्थापित नहीं कर पाया।

क्या नुकसान हुआ?
  • अन्वेषा सैटेलाइट और अन्य सभी 15 पेलोड अब अपनी कक्षा में तैनात होने में विफल माने जा रहे हैं। यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि ये सैटेलाइट विभिन्न वैज्ञानिक और व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए भेजे गए थे।
  • फिलहाल इसरो डेटा का गहन विश्लेषण कर रहा है ताकि पता लगाया जा सके कि असफलता की मूल वजह क्या थी और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
क्या पहले भी ऐसे अनुभव आए हैं?

यह ISRO के PSLV प्रोग्राम का एक दुर्लभ लेकिन दूसरा महत्वपूर्ण असफल प्रयास है। मई 2025 में PSLV-C61 मिशन भी तीसरे चरण में समस्या के कारण विफल रहा था, जब EOS-09 सैटेलाइट को सही कक्षा में नहीं पहुंचाया जा सका था।

PSLV कार्यक्रम — सफलता भी और चुनौतियाँ भी

India’s PSLV mission fails,PSLV को ISRO का workhorse यानी भरोसेमंद रॉकेट माना जाता है और उसने दशकों में कई महत्वपूर्ण मिशन सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। इनमें चंद्रयान-1, मंगलयान, आदित्य-L1 जैसे मिशन शामिल हैं। इसके बावजूद, अंतरिक्ष अभियानों में तकनीकी जटिलता उच्च होती है और हर मिशन में चुनौतीपूर्ण स्थितियां पैदा हो सकती हैं, जिससे कभी-कभी अप्रत्याशित परिणाम सामने आते हैं।

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