Etawah जिले के बकेवर क्षेत्र स्थित दान्दरपुर गांव में कथावाचक मुकुट मणि यादव और उनके सहायक संत कुमार यादव के साथ कथित तौर पर हुई बदसलूकी और जातीय उत्पीड़न की घटना ने पूरे प्रदेश की राजनीति को गर्म कर दिया है।
जहां एक ओर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने दोषियों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए तीन दिन में कार्रवाई न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश सरकार के मंत्री Kapil Dev Agarwal ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
Akhilesh Yadav ने X पर उठाई आवाज
Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि दान्दरपुर गांव में भागवत कथा के दौरान कथावाचकों की जाति पूछी गई। कथित रूप से जब उन्होंने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग की जाति बताई, तो कुछ वर्चस्ववादी लोगों ने उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कथावाचकों के बाल और चोटी काटे गए, नाक रगड़वाई गई, इलाके की शुद्धि कराई गई, और यह सब जातीय भेदभाव के चलते किया गया।

Akhilesh ने कहा,“हमारा संविधान ऐसे किसी भेदभाव की इजाजत नहीं देता। यह व्यक्ति की गरिमा और जीवन के मौलिक अधिकार के खिलाफ अपराध है। अगर तीन दिनों में सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो हम ‘पीडीए के मान-सम्मान की रक्षा’ के लिए बड़ा आंदोलन करेंगे।”
मंत्री Kapil Dev Agarwal का जवाब: “कार्यवाही हो चुकी है, आंदोलन की आवश्यकता नहीं

सरकारी पक्ष से तकनीकी शिक्षा मंत्री Kapil Dev Agarwal ने बयान दिया कि Etawah की यह घटना निंदनीय है, लेकिन पुलिस-प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए FIR दर्ज की है और गिरफ्तारियां भी हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला पीडीए से नहीं जुड़ा, बल्कि एक सामाजिक विद्वेष का विषय है, जिसे राजनीतिक रंग नहीं देना चाहिए।
मंत्री ने कहा, “यह योगी सरकार है, यहां दोषियों को छोड़ा नहीं जाता। पिछली सरकारों की तरह कार्रवाई टाली नहीं जाती। इसलिए न आंदोलन की जरूरत है, न चेतावनी देने की।”
पीड़ितों के आरोप: बाल काटे गए, चोटी छीनी गई, अमानवीय व्यवहार हुआ
पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि उन्हें कथावाचक मानने से इनकार करते हुए बंधक बनाया गया, जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया, संत कुमार यादव के बाल और चोटी काटी गई, एक महिला से जबरन पैर छुआए गए, हारमोनियम तोड़ा गया, और उन पर मानव मूत्र छिड़का गया। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, जिससे मामले को और अधिक तूल मिल गया है
Etawah की यह घटना न केवल सामाजिक असहिष्णुता का चिंताजनक उदाहरण है, बल्कि यह दिखाती है कि जातिगत भेदभाव आज भी किस तरह समाज में मौजूद है। ऐसे में यह आवश्यक है कि प्रशासन निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई करे और राजनीतिक दल जनता की संवेदनाओं का सम्मान करते हुए जिम्मेदारी से व्यवहार करें।