Krishna janmbhoomi case : अदालत में सुनवाई जारी

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By Akanksha Singh Baghel

Krishna janmbhoomi case उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले का एक संवेदनशील धार्मिक मामला है। यह विवाद भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली और कटरा केशव देव क्षेत्र में स्थित शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर है। विवाद का मुख्य बिंदु यह है कि जिस भूमि पर मस्जिद स्थित है, वह मूल रूप से भगवान श्रीकृष्ण का जन्मस्थान है।

प्रमुख तारीखें और घटनाएं

1968: श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और शाही ईदगाह ट्रस्ट के बीच समझौता हुआ, जिसमें जमीन का बंटवारा तय किया गया था।

2020: रंजना अग्निहोत्री और अन्य ने याचिका दायर की, जिसमें ईदगाह मस्जिद को हटाने की माँग की गई।

18 जुलाई 2025: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में सुनवाई हुई, जिसमें सभी पक्षों से दस्तावेज़ और जवाब मांगे गए।

हिन्दू पक्ष की दलील

दावा है कि पूरा क्षेत्र श्रीकृष्ण जन्मभूमि है और शाही ईदगाह मस्जिद मुगल काल में मंदिर को तोड़कर उसके अवशेषों पर बनाई गई थी।

1968 का समझौता अमान्य बताया गया है क्योंकि सेवा संघ को भूमि का पूर्ण अधिकार नहीं था।

याचिकाकर्ता कहते हैं कि यह मसला आस्था और संस्कृति से जुड़ा है, और मंदिर को पुनः उसी स्थान पर पूर्ण रूप से स्थापित करना ज़रूरी है।

मुस्लिम पक्ष की दलील

ईदगाह ट्रस्ट और मुस्लिम पक्षकार 1968 के समझौते को वैध मानते हैं और कहते हैं कि उस समय दोनों पक्षों की सहमति से यह तय हुआ था।

उनका कहना है कि मस्जिद को हटाना संविधान और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ होगा, और यह विवाद फिर से साम्प्रदायिक तनाव को बढ़ा सकता है।

मुस्लिम पक्ष यह भी कहता है कि कोर्ट इस समझौते को कई दशकों तक मान्यता देता रहा है, इसलिए अब इसे चुनौती देना न्यायसंगत नहीं।

कोर्ट की टिप्पणियाँ

कोर्ट ने कहा कि यह मामला अत्यंत संवेदनशील है और इसके ऐतिहासिक साक्ष्य और क़ानूनी दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लिया जाएगा। अदालत ने सभी पक्षों को संयम बरतने और न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग देने को कहा।

आगे की सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई अगस्त 2025 के पहले सप्ताह में प्रस्तावित है, जिसमें अधिक दस्तावेज़ी साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे।


निष्कर्ष:

Krishna janmbhoomi case आस्था, ऐतिहासिक तथ्यों और संविधान के सिद्धांतों के बीच संतुलन खोजने की कोशिश है। इसका निष्पक्ष समाधान न्यायपालिका के विवेक पर निर्भर करता है।

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