Manipur violence: मणिपुर में नई सरकार बनने के बाद कुकी संगठनों का विरोध फिर से शुरू हो गया है । सरकार में शामिल होने वाले कुकी विधायकों को गद्दार बताते हुये उनको जान से मारने के लिये लाखों के इनाम की घोषणा की गई है ।
मणिपुर में करीब एक साल बाद फिर से भारतीय जनता पार्टी के शासन में नई सरकार की वापसी तो हो गई है, लेकिन अब भी लग रहा है कि वहां शान्ति बहाल करना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है । 5 फरवरी को नई सरकार के शपथ लेने के बाद चुराचांदपुर जिले में फिर से हिंसा भड़क उठी है । यह जिला कुकी समुदाय का बहुल जिला है जहां कल सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई । इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की, टायर जलाये और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया । यह सारा बवाल उन कुकी समुदाय के विधायकों के खिलाफ किया गया जिन्होंने नई सरकार में हिस्सा बनने का फैसला किया है ।
प्रदर्शनकारियों का आरोप विधायकों ने समाज के साथ किया धोखा
दरअसल कुकी संगठनो ने नई सरकार के गठन के खिलाफ शटडाउन और सामाजिक बहिष्कार का आह्वान किया था। लेकिन कुकी समुदाय के पांच विधायक सरकार में शामिल हो गये, इनमें से एक महिला विधायक नेमचा किपगेन ने तो उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली । इस बात ने आग में घी का काम किया और फिर से हिंसा भड़क उठी ।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार में शामिल विधायकों ने समाज के साथ धोखा किया है । उनका कहना है कि कुकी संगठन पहले ही तय कर चुका है कि जब तक अलग केंद्र शासित प्रदेश की मांग पूरी नहीं होती वे सरकार का हिस्सा नहीं बनेंगे।
उपमुख्यमंत्री को मारने के 20 लाख का इनाम
मणिपुर में हालात इतने तनावपूर्ण है कि सशस्त्र कुकी समूहों ने उपमुख्यमंत्री को मारने के लिए 20 लाख रूपये और अन्य दो विधायकों को मारने के लिये 10-10 लाख रुपये इनाम की घोषणा की है ।
कुकी जो काउंसिल का कहना है कि इन विधायकों ने जनवरी में हुये गुवाहटी के उस समझौते को तोड़ा है । उनके मुताबिक बिना किसी ठोस राजनीतिक समाधान के मैतेई बहुल सरकार में शामिल होना उन लोगों के बलिदान का अपमान करना है जिन्होने इस जातीय संघर्ष में जान गवाई है ।
Manipur violence सरकार के लिए बड़ी चुनौती
पिछले साल 13 फरवरी से लागू हुए राष्ट्रपति शासन शासन को भारतीय जनता पार्टी ने हटाकर नई सरकार बनाई । इस सरकार से उम्मीद थी कि एक मैतेई मुख्यमंत्री के साथ कुकी और नागा समुदाय का उपमुख्यमंत्री बनाकर राज्य में शांति बहाल की जा सकेगी ।
हालंकि शपथ ग्रहण के तुरंत बाद हुई इस हिंसा ने सरकार की चिंताओ को फिर से बढ़ा दिया है । अब देखना यह है कि नई सरकार इन नाराज समुदायों को कैसे समझाती है और राज्य मे शांति बहाल करने में कितनी कामयाब साबित होती है