Nepal Prime Minister नेपाल की राजधानी में शुक्रवार को राजनीतिक उथल-पुथल का माहौल था। प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने बढ़ते दबाव और हिंसक प्रदर्शनों के बीच इस्तीफा दे दिया, जिससे देश एक नए संक्रमणकालीन दौर में प्रवेश कर गया है।
विस्फोटक पृष्ठभूमि:
- सरकार द्वारा लगाई गई सोशल मीडिया पाबंदी ने ‘प्रोटेस्ट ऑफ जन Z’ का रूप ले लिया, जिसने युवाओं में व्यापक असंतोष जगा दिया। पुलिस की कार्रवाई, जिसमें टीयर गैस और रबर बुललेट्स भी शामिल थे, के परिणामस्वरूप कम से कम 19 लोग मारे गए। कई सरकारी इमारतों—including संसद, प्रधानमंत्री का आवास और सुप्रीम कोर्ट—में आग लगा दी गई। इसी के बाद ओली ने 9 सितंबर 2025 को इस्तीफा दिया।
सेना की तैनाती और नियंत्रण बहाल:
- स्थिति को संभालने के लिए नेपाली सेना को राजधानी की सड़कों पर व्यवस्था बहाल करने के लिए तैनात किया गया। सैन्य अधिकारियों ने नागरिकों से संयम की अपील की और यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में रहे।
अंतरिम प्रधानमंत्री की संभावना: शुशिला करकी का नाम उभरकर सामने आया
- हिंसक राजनीतिक संकट के बीच, प्रदर्शनकारी युवाओं—विशेषकर जन Z समूह—ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश शुशिला करकी को अस्थायी प्रधानमंत्री के रूप में आगे बढ़ाया। उनका नाम इसलिए सुझाया गया क्योंकि वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ी नहीं हैं और निष्पक्षता के प्रतीक मानी जाती हैं।
- ANI और खबरहब जैसे मीडिया सूत्रों का यह भी कहना है कि एक वर्चुअल बैठक में जन Z ने उन्हें सर्वसम्मति से चुना और यह प्रस्ताव अब सेना प्रमुख के समक्ष रखा जा रहा है।
शुशिला करकी: इतिहास और भूमिका
- वे नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रही हैं (2016–2017)। न्यायपालिका में उनके योगदान में भ्रष्टाचार विरोधी रूझान स्पष्ट था—उनके फैसलों में महिलाओं को नागरिकता अधिकार देना और मंत्रियों की दोषसिद्धि शामिल है।
- जन Z आंदोलन के लिए वे एक भरोसेमंद विकल्प बन गई हैं—वक़्त और परिप्रेक्ष्य ने उन्हें गैर-पक्षपाती और सक्षम नेता के रूप में उभारा है।
समाचार लेख (सूत्रों के आधार पर एकत्रित)
नेपाल में राजनीतिक उथल-पुथल जारी: ओली का इस्तीफा, सेना ने लगाने शुरु किया नियंत्रण, शुशिला करकी को संभावित अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में समर्थन
काठमाडौं — बढ़ते भ्रष्टाचार और सामाजिक असमानता के खिलाफ जन Z-नेतृत्व वाले प्रदर्शनों ने नेपाल की राजनीतिक स्थिरता को झकझोर दिया है। सोशल मीडिया प्रतिबंध को हटाने के बावजूद हालात नियंत्रण से बाहर चले गए, जिसके चलते प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को बुधवार, 9 सितंबर को इस्तीफा देना पड़ा। इस दौरान हुई हिंसा में कम से कम 19 लोग मारे गए, और कई सरकारी इमारतें आग के हवाले कर दी गईं।
सेना ने राजधानी में कर्फ्यू लागू करते हुए सुरक्षा बहाल करने का बीड़ा उठाया। जन Z-आंदोलन के प्रतिनिधियों ने अब पूर्व मुख्य न्यायाधीश शुशिला करकी को अस्थायी प्रधानमंत्री पद के लिए प्रस्तावित किया है—उनका नाम विपक्षी-रहित और न्याय-प्रधान नेतृत्व की उम्मीदों से मेल खाता है।
Nepal Prime minister करकी को यह प्रस्ताव एक वर्चुअल बैठक में सर्वसम्मति से चुना गया और इसे अब नेपाली सेना प्रमुख के समक्ष औपचारिक रूप से रखा जाएगा। यदि मंजूर हुआ, तो यह नेपाल के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण होगा—एक अराजक दौर में गैर-राजनीतिक और न्याय-प्रधान नेतृत्व का उदय।