महोबा में बवाल: भाजपा विधायक ने रोका कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का काफिला

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By Shreya Ojha

महोबा में बवाल ,शुक्रवार को राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मची जब प्रधानमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का काफिला बीजेपी विधायक बृजभूषण राजपूत तथा लगभग 100 ग्राम प्रधानों ने बीच सड़क रोक दिया। यह घटना रामश्री महाविद्यालय के पास उस समय हुई, जब मंत्री ‘युवा उद्घोष कार्यक्रम’ से लौट रहे थे।

विरोध का कारण: पानी और सड़कों की स्थिति

विधायक बृजभूषण राजपूत और ग्राम प्रधानों ने सड़कों की खराब हालत और ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के तहत खोदी गई सड़कों की मरम्मत न होने तथा पेयजल आपूर्ति में देरी जैसे मुद्दों को लेकर मंत्री के काफिले को रोक लिया। उनका कहना था कि पाइपलाइन डालने के बाद सड़कों की बहाली नहीं करवाई गई, जिससे ग्रामीणों को आने-जाने में भारी परेशानी हो रही है।

विवादित माहौल और झड़प

काफी देर तक सड़क पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और झड़प देखने को मिली। मंत्री के समर्थक तथा सुरक्षा कर्मी आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जबकि विरोध करने वाले पीछे हटने को तैयार नहीं थे। इस दौरान सीओ सदर व कोतवाल को मौके पर बुलाकर स्थिति को नियंत्रित किया गया।

मंत्री और विधायक के बीच बातचीत

स्थिति बिगड़ने के बाद स्वतंत्र देव सिंह खुद कार से उतरकर विधायक से बातचीत करने पहुँचे। दोनों नेताओं के बीच काफी देर बहस हुई, जिसमें विधायक ने मुखर होकर ग्रामीणों की परेशानियों को स्पष्ट किया। मंत्री ने कहा कि वे इस मामले की गंभीरता से जांच करेंगे और ज़रूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी करेंगे।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया

महोबा में बवाल के बाद प्रशासन ने दोनों पक्षों को डीएम कार्यालय पर बुलाया और घंटों बैठक कर ग्रामीणों एवं ग्राम प्रधानों की समस्याओं को सुना। प्रशासन ने सड़कों की मरम्मत और पेयजल आपूर्ति सुधारने का आश्वासन भी दिया।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएँ

ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन मिशन एक अच्छी योजना है, लेकिन सड़कों की ठीक तरह मरम्मत न होने के कारण उनकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। कई लोग स्कूल, बाज़ार और अस्पताल तक पहुँचने में दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।

महोबा में बवाल,यह घटना सिर्फ स्थानीय प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गई, बल्कि राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गई है, जिसमें भाजपा के भीतर के मतभेद और दबाव की झलक साफ़ दिखाई दे रही है।

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