Satyapal Malik,जम्मू-कश्मीर, गोवा और मेघालय जैसे राज्यों के पूर्व राज्यपाल और वरिष्ठ राजनेता का आज निधन हो गया। उन्होंने दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह 79 वर्ष के थे और बीते कई महीनों से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे।
राजनीतिक जीवन की शुरुआत और सफर
Satyapal Malik का जन्म बागपत, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1970 के दशक में चौधरी चरण सिंह की भारतीय क्रांति दल से एक विधायक (MLA) के रूप में की थी। इसके बाद उन्होंने कई राजनीतिक दलों का दामन थामा और लगभग पचास वर्षों तक भारतीय राजनीति का सक्रिय चेहरा बने रहे।
राज्यसभा से लेकर कांग्रेस तक का सफर
1980 में, मलिक को चरण सिंह की अगुवाई वाले लोक दल से राज्यसभा भेजा गया। लेकिन 1984 में उन्होंने कांग्रेस जॉइन कर ली और 1986 में पार्टी ने उन्हें फिर से राज्यसभा भेजा।
राज्यपाल के रूप में कार्यकाल और विवाद
सत्यपाल मलिक का कार्यकाल सबसे अधिक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के रूप में चर्चा में रहा। उन्होंने उस दौरान राज्य की कमान संभाली जब अनुच्छेद 370 को हटाया गया — यह भारतीय राजनीति का एक ऐतिहासिक मोड़ था। इसके बाद वह गोवा और फिर मेघालय के राज्यपाल भी रहे।
निडर और विवादास्पद बयानों के लिए मशहूर
मलिक हमेशा अपने बेबाक अंदाज़ के लिए जाने जाते थे। वह कई बार केंद्र सरकार की आलोचना करके विवादों में रहे। उन्होंने एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार और 2019 के पुलवामा हमले को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। उनके बयान अक्सर केंद्र के लिए असहजता का कारण बनते थे।
आखिरी वर्षों में फिर से राजनीति की ओर रुझान
अपने जीवन के अंतिम वर्षों में, खासकर जाट और किसान समुदाय के बीच, वह फिर से राजनीतिक सक्रियता दिखा रहे थे। किसान आंदोलन के दौरान उनके बयानों ने उन्हें फिर से राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया था।

अंतिम विदाई
मलिक के निधन से भारतीय राजनीति के एक लंबे और बहुपक्षीय अध्याय का अंत हो गया। वे एक ऐसे नेता थे जो सत्ता में रहते हुए भी सरकार से सवाल पूछने की हिम्मत रखते थे। उनके निधन पर देशभर से श्रद्धांजलि संदेश आने लगे हैं।