स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी आदित्यनाथ को चुनौती दी — 40 दिनों में ‘हिंदू होने का प्रमाण’ देने को कहा।
प्रसिद्ध शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सार्वजनिक रूप से चुनौती देते हुए कहा है कि उन्हें 40 दिनों के भीतर अपने हिंदू होने का प्रमाण देना चाहिए।
शंकराचार्य ने वाराणसी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा गया था, जिसे उन्होंने प्रस्तुत कर दिया और स्वीकार भी कर लिया गया। अब उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को खुद यह साबित करना चाहिए कि वे वास्तव में हिंदू हैं और वे हिंदू धर्म की मूल मान्यताओं, विशेषकर गो-भक्ति और गौ संरक्षण, के प्रति वफादार हैं।
क्या मांगे शंकराचार्य ने?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री के सामने स्पष्ट तीन मुख्य मांगें रखीं:
- गो-भक्ति का प्रमाण देना — उन्होंने कहा कि हिंदू होने का सबसे पहला चरित्र गौ और गोमाता के प्रति प्रेम होना चाहिए।
- गोमाता को ‘राज्यमाता’ घोषित करना — महाराष्ट्र सरकार की तरह उत्तर प्रदेश में भी गौ को राज्य की माता का दर्जा देना चाहिए।
- गोमांस (बीफ़) निर्यात पर पूर्ण रोक — उन्होंने चेतावनी दी कि गोहत्या और बीफ़ निर्यात पर रोक लगाना हिंदू धर्म की संवेदना के पक्ष में ठोस कदम होगा।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “यदि 40 दिनों के भीतर यह सब नहीं हुआ, तो माना जाएगा कि मुख्यमंत्री ग़ैर-हिंदू या ‘नकली हिंदू’ हैं।”
सियासी और धार्मिक पटल पर प्रतिक्रिया
स्वामी की इस घोषणा ने उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और धार्मिक परिदृश्य में हलचल पैदा कर दी है। कुछ राजनीतिक नेताओं ने इस चुनौती पर तीखी आलोचना भी की है, यह कहते हुए कि सरकार का काम संविधान और कानूनी रूप से चलाना है, न कि धर्म का प्रमाण मांगा जाना।
वहीं संत समाज और हिंदू संगठनों के बीच भी इस टिप्पणी पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं, जिसमें कुछ इसे धार्मिक विश्वासों की रक्षा का आग्रह मानते हैं और कुछ इसे असंगत राजनीतिक बयान करार दे रहे हैं।
यह विवाद कैसे शुरू हुआ?
यह मामला माघ मेले के दौरान प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच महा-घाट पर स्नान विवाद के बाद उठा था, जब उन्हें प्रसाशनिक रुकावटों का सामना करना पड़ा था। इसी के बाद से शंकराचार्य ने लगातार सरकार की नीतियों और निर्णयों पर आपत्ति जताई थी।