Vice President Jagdeep Dhankhar ने दिया उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा, स्वास्थ्य का दिया हवाला

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By Akanksha Singh Baghel

Vice President Jagdeep Dhankhar भारत के 14वें उपराष्ट्रपति ने सोमवार को अचानक अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। उनका इस्तीफा एक ऐसे समय में आया जब संसद का मानसून सत्र अभी-अभी शुरू हुआ था ।


लिखा राष्ट्रपति को भावुक पत्र


धनखड़ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भावुक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने प्राप्त स्नेह के लिए आभार प्रकट करते हुए स्पष्ट रूप से बताया कि उन्हें स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और चिकित्सकीय सलाह के कारण यह निर्णय लेना पड़ था है ।
उन्होंने अपने इस्तीफे को संविधान के अनुच्छेद 67(a) के अन्तर्गत दिया और तत्काल प्रभाव से इसे मान्य करने का आग्रह किया साथ ही पत्र में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रि परिषद के प्रति उन्होंने अपनी कृतज्ञता एवं सम्मान व्यक्त किया ।

लंबे समय से चल रहे अस्वस्थ्य

धनखड़ को दिल्ली एम्स में हृदय जांच समेत अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए मार्च 2025 में भर्ती कराना पड़ा था ।
अब की बार उन्होंने स्पष्ट किया कि चिकित्सकों द्वारा सलाह दी गई थी कि उन्हें अपनी सेहत पर फोकस करना चाहिए।

क्या होगा आगे का राजनीतिक घटनाक्रम

उपराष्ट्रपति का इस्तीफा आते ही राज्यसभा की स्थापना उन्हीं के अधीन थी अब पर प्रभाव पड़ेगा।
संसद चलने के दौरान यह बदलाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अनिश्चितता उत्पन्न कर सकता है, खासकर यदि विपक्ष उम्मीदवारी पेश करती है।
राजनीतिक दलों को जल्द ही नई उपराष्ट्रपति चयन प्रक्रिया शुरु करनी होगी। संविधान के अनुसार, नई चुनाव प्रक्रिया जल्द शुरू की जानी चाहिए ।

कैसा रहा Vice President Jagdeep Dhankhar का कार्यकाल ?

अगस्त 2022 में चुने गए धनखड़ ने 528 मतों से अधिक से विजयी होकर उपराष्ट्रपति पद संभाला था, जो उस चुनाव में सबसे बड़ी वोट बहुमत में से एक था ।

उपराष्ट्रपति के साथ-साथ उन्होंने राज्यसभा के सभापति के रूप में भी अहम भूमिकाएं निभाई।

उनके कार्यकाल में विपक्ष और सरकार के बीच कई बार राजनैतिक विवाद भी देखे गए, पर उन्होंने संविधान और संसदीय मर्यादाओं का सख्ती से पालन करने का प्रयत्न किया।

राजनीतिक दलों ने उनके स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफे को सम्मानजनक निर्णय बताते हुए उनके स्वास्थ्य के लिए शुभकामनाएँ दी हैं।
संसद के मानसून सत्र का कार्यकाल जारी रहेगा, लेकिन अब इस पर उपराष्ट्रपति की भूमिका अधर में है।

चुनाव आयोग द्वारा अगला चुनाव घोषित होना शेष है, जिसमें देश की राजनीतिक दिशा और दल-बदल की संभावनाएं सामने आ सकती हैं।

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