West Bengal SIR में नया विवाद: चुनाव अधिकारी ने ‘असली वोटरों के नाम हटाए जा रहे’ कहते हुए दिया इस्तीफा

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By Akanksha Singh Baghel

West Bengal SIR New Controversy प्रक्रिया को लेकर चुनावी माहौल एक बार फिर गरमाया है। एक असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO) ने आरोप लगाया है कि SIR के तहत “असल मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जा रहे हैं” और इसी के विरोध में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

कौन हैं इस विवाद के मुख्य पात्र?
  • AERO मौसम सरकार ने बागनान विधानसभा क्षेत्र के लिए SIR-संबंधित काम से इस्तीफा दे दिया और Election Registration Officer (ERO) को अपना पत्र सौंपा। उन्होंने दावा किया कि

•”लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी” के नाम पर वास्तविक वोटरों को हटाया जा रहा है,

•स्पेलिंग / उम्र या परिवार डेटा को आधार बनाकर उनको अनुचित रूप से हटाने का प्रयास हो रहा है

•संसाधन और दस्तावेज़ उपलब्ध होने के बावजूद नाम हटाने की कोशिशें हो रही हैं।

SIR प्रक्रिया क्या है और क्यों विवाद में है?

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चुनाव आयोग द्वारा चलाया गया एक विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट, साफ़ और त्रुटि-मुक्त बनाना है। इसमें मतदाताओं की जानकारी की फिर से जांच-परख होती है, ताकि

•मृत

•जगह बदल चुके

•डुप्लिकेट

•सत्यापन योग्य दस्तावेज़ न होने वाले नाम हटाए-संशोधित किए जाएँ।

हालांकि आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया कानूनी ढांचे के भीतर की जा रही है और सभी मतदाता अपने नाम को पुनः जोड़ने का अवसर पा सकते हैं, राजनीतिक दलों और स्थानीय अधिकारियों ने व्यापक आपत्तियाँ जताई हैं।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर पहले से ही बड़ा विवाद चलता आया है:

  • ड्राफ्ट वोटर सूची में 58 लाख से अधिक नाम हटाए गए — जिसमें मृत, स्थानान्तरण, लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी और डुप्लीकेट मतदाता शामिल हैं — जिससे राजनीतिक दलों ने आलोचना तेज़ कर दी।
  • मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और TMC ने आरोप लगाया कि SIR का उपयोग वास्तविक और समर्थक मतदाताओं को सूची से बाहर करने के लिए राजनीतिक लाभ हासिल करने की साजिश के रूप में किया जा रहा है।
  • Timesविरोध में vigilance drives और प्रत्यक्ष / अप्रत्यक्ष कानूनी कदम भी उठाए जा रहे हैं।
क्या SIR से सभी नाम स्थायी रूप से हटाए गए हैं?

West Bengal SIR New Controversy,ड्राफ्ट सूची के बाद जनता के पास दावों, विरोधों और सुनवाई के लिए समय है। जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के ज़रिये अपने नाम को पुनः सूची में जोड़ने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

अगले कदम और संभावित प्रभाव
  • सुनवाई और objections period जारी है, जिससे प्रभावित मतदाता अपनी बात रख सकते हैं।
  • इस मामले ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में राजनीतिक चुनौतियाँ खड़ी की हैं और आगे न्यायालयीन समीक्षा की गुंजाइश बनी हुई है।
  • आगामी विधानसभा चुनावों से पहले यह मामला राजनीतिक मोर्चे पर मुख्य विवाद बन गया है, जिससे मतदाता विश्वास और लोकतांत्रिक सहभागिता पर बहस तेज़ हुई है।

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