B.Sudarshan Reddy, विपक्षी INDIA गठबंधन ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज B.Sudarshan Reddy को उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए अपना संयुक्त उम्मीदवार घोषित किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह चुनाव एक “वैचारिक लड़ाई” है, जिसका उद्देश्य संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करना है। खड़गे ने रेड्डी को ऐसा न्यायविद बताया “जिन्होंने अपने फैसलों से गरीबों का साथ दिया और न्याय को मजबूती दी।”
न्यायिक करियर
8 जुलाई 1946 को जन्मे B.Sudarshan Reddy बी.ए. और एलएलबी की डिग्री हासिल की। उन्होंने 1971 में आंध्र प्रदेश बार काउंसिल में वकालत शुरू की और मुख्य रूप से रिट और सिविल मामलों की पैरवी की। उनकी गिनती ईमानदार और सिद्धांतवादी वकीलों में होती थी।
रेड्डी को 2 मई 1995 को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का स्थायी जज नियुक्त किया गया। बाद में वे 5 दिसंबर 2005 को गुवाहाटी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। इसके बाद 12 जनवरी 2007 को सुप्रीम कोर्ट के जज पद पर नियुक्त हुए और 8 जुलाई 2011 को सेवानिवृत्त हुए।
सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई अहम फैसले दिए, जिनका सीधा असर समाज के कमजोर वर्गों पर पड़ा। वे ऐसे न्यायाधीश माने जाते हैं जिन्होंने संविधान की मूल भावना और मौलिक अधिकारों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
अन्य भूमिकाएँ
न्यायपालिका से अलग, रेड्डी मार्च 2013 में गोवा के पहले लोकायुक्त बने। हालांकि सात महीने बाद उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफ़ा दे दिया। वे आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के गवर्नमेंट प्लीडर (1988–1990), केंद्र सरकार के एडिशनल स्टैंडिंग काउंसल (1990) और उस्मानिया विश्वविद्यालय के लीगल एडवाइज़र भी रहे।
अपने चार दशक लंबे करियर में वे हमेशा पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय के पक्षधर रहे। उन्हें ek सादगीपूर्ण और न्याय के प्रति समर्पित व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता है।
उपराष्ट्रपति चुनाव
उपराष्ट्रपति चुनाव 9 सितंबर 2025 को होंगे। मौजूदा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अप्रत्याशित इस्तीफ़े के बाद यह चुनाव कराया जा रहा है। नामांकन दाख़िल करने की अंतिम तिथि 21 अगस्त 2025 तय की गई है। इस चुनाव में संसद के दोनों सदनों के सांसद गुप्त मतदान और आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से मतदान करेंगे।
इस बार का चुनाव खास माना जा रहा है क्योंकि INDIA गठबंधन ने एक ऐसे चेहरे को उतारा है जिनकी पृष्ठभूमि पूरी तरह गैर-राजनीतिक है। उनका चयन विपक्ष की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें वे राजनीति से परे जाकर संविधान, न्याय और लोकतंत्र की रक्षा का संदेश देना चाहते हैं।
महत्व
बी. सुदर्शन रेड्डी की उम्मीदवारी को विपक्ष ने एक रणनीतिक और प्रतीकात्मक कदम बताया है। NDA ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए सीपी राधाकृष्णन का नाम घोषित कर द्रविड़ पार्टियों को धर्मसंकट में डालने की कोशिश की थी, क्योंकि दक्षिण की पार्टियों के लिए किसी दक्षिण भारतीय उम्मीदवार का विरोध करना आसान नहीं था। लेकिन INDIA ब्लॉक ने बी. सुदर्शन रेड्डी का नाम सामने रखकर इस रणनीति को मात दी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को उनके नाम की घोषणा करते हुए कहा कि उपराष्ट्रपति पद के लिए बी. सुदर्शन रेड्डी के नाम पर सभी विपक्षी दल एकमत हैं। इस कदम से विपक्ष ने न केवल संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का संदेश दिया है बल्कि राजनीतिक रूप से भी NDA को कड़ी चुनौती पेश की है।